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PANCHAYATI RAJ 2

Thursday 16 November 2017

PANCHAYATI RAJ

                                                            पंचायती राज समितियां 
बलवंत राय मेहता समिति  -     जनवरी 1957 

१. ३ स्तर पंचायती राज की स्थापना की .

२ .ग्राम पंचायत का चुनाव प्रत्यक्ष होता है जबकि पंचायती समिति और जिला समिति का चुनाव अप्रत्यक्ष होता है 

३ . पंचायती समिति - कार्यकारी निकाय होता है 

४ . जिला परिषद् की भूमिका सलाहकार एवं पर्यवेक्षण की होती है 

५.   जिला परिषद् का अध्यक्ष ( चैयरमेन ) -   जिलाधिकारी होता है 


६ बलवंत राय मेहता समिति के सिफारिशों के बाद पहली बार पंचायती राज की  स्थापना राजस्थान के नागौर जिले के बगदरी ग्राम में की गयी . और दूसरा आंध्र प्रदेश था .

 

अशोक मेहता समिति  -  1978 

१ . जनता पार्टी सरकार ने 1978 में अशोक मेहता समिति की बनाई .

२ . इस समिति के सिफारिशें  इस प्रकार है २ स्तर का पंचायती राज होगा जिसमे जिला परिषद् और मंडल पंचायत दो स्तर होंगे .

३ . १५ से २० हज़ार आबादी पर ही मंडल पंचायत का गठन होगा 

४. इस समिति ने जिला स्तर को सबसे ज्यादा महत्त्व दिया 

५. पंचायत के विघटन के बाद चुनाव छह माह की अवधि में होना अनिवार्य है ।


६. अनुसूचित जाती तथा जनजाति को जनसँख्या के अनुपात में सीटे आरक्षित करने की सिफारिश की ।

७. इस कमेटी ने पचायती राज वित्त निगम की स्थापना का सुझाव दिया ।

दन्तेवाला समिति :-
१. इस समिति ने खंड स्तर पर नियोजन की अनुशंसा की ।


जी. वी. के. राव समिति (1985):-
१. इस आयोग ने ग्रामीण विकास और गरीबी निवारण की समीक्षा दी ।

 

लक्ष्मीमल समिति (1986) :-
राजीव गाँधी सरकार ने लोकतंत्र एवं विकास के लिए पंचायतो के पुनर्जीवन नमक समिति की स्थापना की । 

-  लक्ष्मीमल सिंघवी समिति की कुछ अनुशंसाएं :-
 १. पंचायतो को संविधानिक आधार प्रदान किये जाए 
२. त्रिस्तरीय पंचायतो के गठन के लिए भी कहा, (ये है :- ग्राम स्तर, खंड स्तर और जिला स्तर )
३. पंचयत विवाद  निपटाने के  लिए न्याय पंचायत के गठन का भी सुझाव दिया

पी. के. थुंगन समिति (1988) :-
इस समिति के अनुसार भारत में पंचयतो का सम्बन्ध सीधा संघ सरकार से होना चाहिए ।
१. इस समिति ने पंचयती  राज को राज्यों का विषय नहीं माना ।
२. इस समिति ने पंचयती राज संस्थाओ को मजबूत बनाने पर जोर दिया ।

विभिन्न सरकारों द्वारा पंचायती राज लागू करने क लिए किये गए प्रयास :-

१. राजीव गाँधी सरकार ने १९८९ में लोकसभा में ६४ वा संविधान संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया जो भरी बहुमत के साथ पारित भी हो गया लेकिन राज्यसभा में नहीं हुआ ।


२. १९९१ में नरसिंघ राव सरकार ने पुनः इसे संविधानिक आधार देने का प्रयास करा ।

३. ७३ वा तथा ७४ वा संविधान संशोधन साधिनियम १९९२ में पारित हुआ और यह १९९३ लागू हुआ ।

४. इसी के बाद मध्य प्रदेश में पंचायत राज के  चुनाव हुए 

७३ वे संविधान सशोधन के कुछ प्रावधान :-
१. पंचायती राज राज्य सूचि का विषय है ।
२. इस संशोधन के द्वारा ही संविधान में भाग ९ और ११ वी अनुसूची जोड़ी गई ।
३. राज्य सूची में २९ विषय शामिल किये गए ।
४. त्रिस्तरीय पंचयती राज की व्यवस्था की गई ।
५. इसमें यह प्रावधान भी हुआ की जिन राज्यों की आबादी २० लाख से कम है  वहा दो स्तर का पंचयती राज होगा । (जैसे गोवा और मणिपुर )